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Digital Census 2027: अब मोबाइल से खुद भरें जनगणना, 17 अप्रैल से शुरू स्व-गणना प्रक्रिया
- Reporter 12
- 16 Apr, 2026
डिजिटल जनगणना 2027 के तहत 17 अप्रैल से नागरिक मोबाइल के जरिए खुद अपनी जानकारी भर सकेंगे। इस नई प्रक्रिया से डेटा अधिक सटीक और तेज़ी से जुटेगा।
पटना/आलम की खबर:देश में तेजी से बढ़ती डिजिटल व्यवस्था के बीच अब जनगणना की प्रक्रिया भी पूरी तरह बदलने जा रही है। डिजिटल जनगणना 2027 के तहत पहली बार आम नागरिकों को यह सुविधा दी जा रही है कि वे घर बैठे अपने मोबाइल फोन के जरिए खुद अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकें। इस नई व्यवस्था को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल प्रक्रिया तेज होगी बल्कि आंकड़ों की सटीकता भी पहले के मुकाबले बेहतर हो सकेगी।
17 अप्रैल से शुरू हो रही इस स्व-गणना प्रक्रिया को जनगणना के पहले चरण के रूप में देखा जा रहा है। इसके तहत लोगों को अब जनगणना कर्मियों का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि वे स्वयं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जरूरी जानकारी भर सकेंगे। इससे समय की बचत के साथ-साथ पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
17 अप्रैल से 1 मई तक मिलेगा मौका
इस डिजिटल पहल के तहत नागरिकों को 17 अप्रैल से 1 मई तक का समय दिया गया है, जिसमें वे पोर्टल पर जाकर अपने परिवार से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले मोबाइल नंबर के जरिए पंजीकरण करना होगा।
रजिस्ट्रेशन के बाद पोर्टल पर कुल 33 महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनका जवाब देना अनिवार्य होगा। ये प्रश्न परिवार की संरचना, सदस्यों की संख्या, शिक्षा, वैवाहिक स्थिति और आवास से जुड़ी जानकारी से संबंधित होंगे।
एक बार जब व्यक्ति अपनी जानकारी भर देता है, तो उसे एक यूनिक आईडी नंबर प्रदान किया जाएगा। यह आईडी आगे की प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण होगी, इसलिए इसे सुरक्षित रखना जरूरी है।
जनगणना कर्मियों के लिए आसान होगी प्रक्रिया
डिजिटल जनगणना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे फील्ड में काम करने वाले जनगणना कर्मियों का काम काफी आसान हो जाएगा। 2 मई से जब कर्मी घर-घर जाएंगे, तो नागरिकों को केवल अपनी यूनिक आईडी दिखानी होगी।
इससे पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी और बार-बार जानकारी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे समय की बचत के साथ-साथ गलतियों की संभावना भी कम होगी।
मकान और परिवार की नई परिभाषा
इस बार जनगणना में मकान और परिवार के वर्गीकरण को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यदि एक ही घर में अलग-अलग चूल्हे का इस्तेमाल हो रहा है, तो उन्हें अलग परिवार के रूप में गिना जाएगा।
इसी तरह, यदि जनगणना के दौरान कोई मकान खाली मिलता है, तो उसे खाली मकान के रूप में दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा मकान के मालिकाना हक, निर्माण सामग्री, कमरों की संख्या और परिवार में विवाहित जोड़ों जैसी विस्तृत जानकारी भी मांगी जाएगी।
इन सूचनाओं के आधार पर सरकार भविष्य की योजनाओं को अधिक सटीक तरीके से तैयार कर सकेगी।
बाहर रह रहे लोग भी भर सकेंगे जानकारी
इस डिजिटल व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह भी है कि राज्य से बाहर रह रहे लोग भी इसमें भाग ले सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति बिहार का निवासी है लेकिन फिलहाल किसी अन्य राज्य या शहर में रह रहा है, तो वह ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपने मूल निवास की जानकारी दर्ज कर सकता है।
इससे जनगणना का दायरा और अधिक व्यापक हो जाएगा और कोई भी नागरिक इससे छूटेगा नहीं।
साथ ही, डेटा सबमिट करने से पहले उसे संपादित करने की सुविधा भी दी गई है, ताकि लोग अपनी जानकारी को सही तरीके से अपडेट कर सकें।
अधिकारियों को जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश
इस पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने अधिकारियों को व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। लोगों को यह समझाना जरूरी है कि वे समय पर और सही जानकारी भरें, ताकि जनगणना का उद्देश्य पूरा हो सके।
अधिकारियों का मानना है कि यदि नागरिक सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, तो यह पहल एक बड़े बदलाव के रूप में सामने आएगी और भविष्य में अन्य सरकारी प्रक्रियाओं के लिए भी रास्ता खोलेगी।
दो चरणों में पूरी होगी जनगणना
डिजिटल जनगणना 2027 को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण मई 2026 में शुरू हो रहा है, जिसमें मकानों की सूची तैयार की जाएगी और प्रारंभिक जानकारी जुटाई जाएगी।
इसके बाद दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें वास्तविक जनगणना यानी हेडकाउंट किया जाएगा।
इस तरह पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने की योजना बनाई गई है, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
नीति निर्माण में होगी बड़ी भूमिका
जनगणना से प्राप्त आंकड़े किसी भी देश के विकास की आधारशिला होते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर ही सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियां बनाती है।
डिजिटल जनगणना के जरिए मिलने वाला सटीक और अपडेटेड डेटा सरकार को बेहतर निर्णय लेने में मदद करेगा। इससे योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने में भी आसानी होगी।
नागरिकों की जिम्मेदारी भी अहम
इस पूरी प्रक्रिया में नागरिकों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि लोग सही और पूरी जानकारी नहीं देंगे, तो जनगणना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
इसलिए प्रशासन की ओर से अपील की गई है कि सभी लोग अपनी जिम्मेदारी समझें और समय पर पोर्टल पर जाकर सही जानकारी दर्ज करें।
निष्कर्ष
डिजिटल जनगणना 2027 भारत के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। यह न केवल तकनीक के बेहतर उपयोग का उदाहरण है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे पारंपरिक प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाया जा सकता है।
अब यह नागरिकों पर निर्भर करता है कि वे इस पहल का कितना प्रभावी तरीके से उपयोग करते हैं और इसे सफल बनाने में कितना योगदान देते हैं। आने वाले समय में यह प्रणाली देश के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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